उनको ये शिकायत है.. ki mai बेवफ़ाई पे नही likhta,
और mai sochta हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही likhta,'
'ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??
मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही likhta,
'कुछ तो आदत से मज़बूर hai और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,
ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी दुहाई पे नही likhta,'
'दुनिया का क्या है हर हाल mai, इल्ज़ाम लगाती है,
वरना क्या बात?? कि मैं कुछ अपनी.. सफ़ाई पे नही likhta'
'शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़.. मगर एक रुकावट है,
मेरे उसूल hai मैं गुनाहों की.. कमाई पे नही likhta,'
'उसकी ताक़त का नशा.. "मंत्र और कलमे" में बराबर है !!
मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की, लड़ाई पे नही likhta,'
'समंदर को परखने का मेरा, नज़रिया ही अलग है यारों!!
मिज़ाज़ों पे likhta हूँ मैं उसकी.. गहराई पे नही likhta,
'पराए दर्द को , मैं ग़ज़लों में महसूस kerta हूँ ,
ये सच hai मैं शज़र से फल की, जुदाई पे नही likhta,'
'तजुर्बा तेरी मोहब्बत का'.. ना लिखने की वजह बस ये!!
क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी, तबाही पे नही लिखता.
I LOVE YOU MERI JAAN
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RAHUL From
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8890705301 ) |
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